ये बारिश की बूँदे हैं
कुछ तो करती हैं
मुझे रोक नहीं पाती,
अपने आगोश में भरने को,
पत्तों पर ओस की बूंदों सी ,
स्वाति में सीप की मोती सी,
खेतों में अमृत के प्यालों सी,
जिश्म पर यादों की लपटों से,
कुछ इठलाती सी
कुछ बलखाती सी
मुझे रोक नहीं पाती ,
अपने आगोश में भरने को
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