Monday, July 31, 2017

जश्ने मौत!

जो मुझे महसूस हुआ 
जश्ने मौत! मनाने लगे है लोग, 
आज हुई मौतों पर
लोगों में अब सब्र कहाँ,
कि कोई रूककर रो सके दो पल भी,
कब्रे खाक हुई मौतों पर!
हर पल तौली जाने लगी हैं,
कुछ सिक्कों और कुछ रुपयों के भाव,
तलवारें लेकर कूद पड़े हैं लोग
योजनाओं की श्रद्धांजलियों लेकर समाधियों पर
सुबहे-शाम चल चले हैं ये तीर मन पर
जश्ने मौत! मनाने लगे है लोग, आज हुई मौतों पर,
ज़िन्दगी अगर अनमोल है, तो ये बाज़ारी क्यों?
कुछ पल तो ठहर जाओ,
कुछ पल तो पलट लाओ,
कितने अपनों को खो दिया है, अपनों ने
आज हुई मौतों में,
जश्ने मौत! न मनाओ, आज हुई मौतों पर
-- बस यूँही तो नहीं लिखता कोई कुछ... खुद की टीस

Friday, July 21, 2017

बारिश की बूँदे

ये बारिश की बूँदे हैं
कुछ तो करती हैं
मुझे रोक नहीं पाती,
अपने आगोश में भरने को,
पत्तों पर ओस की बूंदों सी ,
स्वाति में सीप की मोती सी,
खेतों में अमृत के प्यालों सी,
जिश्म पर यादों की लपटों से,
कुछ इठलाती सी
कुछ बलखाती सी
मुझे रोक नहीं पाती ,
अपने आगोश में भरने को